उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mawara-e-jahan se aae hain

मावरा-ए-जहाँ से आए हैं

ماورائے جہاں سے آئے ہیں

शायर: Habib Jalib5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मावरा-ए-जहाँ से आए हैं
आज हम ख़ुमसिताँ से आए हैं

इस क़दर बे-रुख़ी से बात न कर
देख तो हम कहाँ से आए हैं

हम से पूछो चमन पे क्या गुज़री
हम गुज़र कर ख़िज़ाँ से आए हैं

रास्ते खो गए ज़ियाओं में
ये सितारे कहाँ से आए हैं

इस क़दर तो बुरा नहीं 'जालिब'
मिल के हम उस जवाँ से आए हैं