उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log jo dil-figar hote hain

लोग जो दिल-फ़िगार होते हैं

لوگ جو دل فگار ہوتے ہیں

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग जो दिल-फ़िगार होते हैं
चलते फिरते मज़ार होते हैं

जो मोहब्बत में ख़ार होते हैं
साहब-ए-सद-वक़ार होते हैं

जिन के दामन में ख़ार होते हैं
क़द्र-दान-ए-बहार होते हैं

जो मोहब्बत-शिआ'र होते हैं
साज़िशों का शिकार होते हैं

मेरी बर्बादी-ए-मोहब्बत पर
आप क्यों शर्मसार होते हैं

उन के क़ौल-ओ-क़रार क्या कहिए
सिर्फ़ क़ौल-ओ-क़रार होते हैं

अपना मतलब निकालने वाले
किस क़दर होशियार होते हैं

पुर-ख़ुलूसों की पूछते क्या हो
ख़ार होते थे ख़ार होते हैं

क्या ख़बर थी कि राह-ए-उल्फ़त में
हर क़दम ख़ारज़ार होते हैं

किस तवक़्क़ो पे लोग ऐ 'आसी'
ज़िंदगी पर निसार होते हैं