उर्दू शायरी · ग़ज़ल

likhne hain abhi marsiya-ha-e-dil-o-jaan aur

लिखने हैं अभी मर्सिया-हा-ए-दिल-ओ-जाँ और

لکھنے ہیں ابھی مرثیہ ہائے دل و جاں اور

शायर: Obaidullah Aleem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लिखने हैं अभी मर्सिया-हा-ए-दिल-ओ-जाँ और
कुछ ज़ख़्म मुझे ऐ मिरे मरहम-नज़राँ और

इतना ही कि बस नग़्मा-सरायान-ए-जहाँ हैं
मिलता नहीं कुछ इस के सिवा अपना निशाँ और

खींचे है मिरी तब'-ए-सुख़न अपनी ही जानिब
और गर्दिश-ए-दौराँ है कि दिखलाए समाँ और

कुछ नज़्र हुए वक़्त की बे-रहम हवा के
कुछ ख़्वाब अभी मेरे लहू में हैं रवाँ और

हर लहज़ा मैं आज़ादी-ए-जाँ का था तलबगार
हर गाम पड़ी पाँव में ज़ंजीर-ए-गिराँ और