उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankh se dur sahi dil se kahan jaega

आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगा

آنکھ سے دور سہی دل سے کہاں جائے گا

शायर: Obaidullah Aleem4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगा
जाने वाले तू हमें याद बहुत आएगा

ख़्वाब सा देखा है ता'बीर न जाने क्या हो
ज़िंदगी भर कोई अब ख़्वाब ही दोहराएगा

टूट जाएँ न कहीं प्यार के नाज़ुक रिश्ते
वक़्त ज़ालिम है हर इक मोड़ पे टकराएगा

'इश्क़ को जुर्म समझते हैं ज़माने वाले
जो यहाँ प्यार करेगा वो सज़ा पाएगा