उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aao tum hi karo masihai

आओ तुम ही करो मसीहाई

آؤ تم ہی کرو مسیحائی

शायर: Obaidullah Aleem8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आओ तुम ही करो मसीहाई
अब बहलती नहीं है तन्हाई

तुम गए थे तो साथ ले जाते
अब ये किस काम की है बीनाई

हम कि थे लज़्ज़त-ए-हयात में गुम
जाँ से इक मौज-ए-तिश्नगी आई

हम-सफ़र ख़ुश न हो मोहब्बत से
जाने हम किस के हों तमन्नाई

कोई दीवाना कहता जाता था
ज़िंदगी ये नहीं मिरे भाई

अव्वल-ए-इश्क़ में ख़बर भी न थी
इज़्ज़तें बख़्शती है रुस्वाई

कैसे पाओ मुझे जो तुम देखो
सतह-ए-साहिल से मेरी गहराई

जिन में हम खेल कर जवान हुए
वही गलियाँ हुईं तमाशाई