उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahu bahta hai chhaalon se kaleja sukh jata hai

लहू बहता है छालों से कलेजा सूख जाता है

لہو بہتا ہے چھالوں سے کلیجہ سوکھ جاتا ہے

शायर: Danish Karanjavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहू बहता है छालों से कलेजा सूख जाता है
ग़मों की धूप में तपने से चेहरा सूख जाता है

सितम देखो फ़िराक़-ए-यार में रो भी नहीं सकते
अगर रोते हैं तो आँखों का झरना सूख जाता है

भला इज़हार हम कैसे करें अपनी तमन्ना का
लबों तक बात आती है तो लहजा सूख जाता है

सदा तुम हुस्न-ए-ज़न रखना अगर रिश्ता निभाना हो
ग़लत-फ़हमी ने दस्तक दी तो रिश्ता सूख जाता है

ज़ियादा पासदारी 'इश्क़ में अच्छी नहीं 'दानिश'
अगर पानी ज़ियादा दो तो पौदा सूख जाता है