उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is se pahle ki jhulas jaun main jangal ki tarah

इस से पहले कि झुलस जाऊँ मैं जंगल की तरह

اس سے پہلے کہ جھلس جاؤں میں جنگل کی طرح

शायर: Danish Karanjavi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस से पहले कि झुलस जाऊँ मैं जंगल की तरह
टूट के मुझ पे बरस जा किसी बादल की तरह

दिल की दीवार को ज़ालिम तिरी उम्मीद-ए-वस्ल
चाक करती ही चली जाती है पीपल की तरह

ये मिरा ख़ून-ए-जिगर है इसे ज़ाए' मत कर
आँख पर अपनी सजा ले इसे काजल की तरह

इस से पहले कि ज़मीं बोझ समझ ले हम को
हम ज़मीं ओढ़ के सो जाएँगे कम्बल की तरह