उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon tir mere sine ke us par nahin hai

क्यों तीर मेरे सीने के उस पार नहीं है

کیوں تیر میرے سینے کے اس پار نہیں ہے

शायर: Danish Karanjavi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों तीर मेरे सीने के उस पार नहीं है
शायद तिरी नज़रों में अभी धार नहीं है

वो राज़-ए-दिल आँखों से समझ जाए तो अच्छा
मुझ में तो कहीं जुरअत-ए-इज़हार नहीं है

हँसते हुए तस्लीम करो धूप की चादर
क़िस्मत में अगर साया-ए-दीवार नहीं है

ठोकर जो लगी हम ने सँभल कर यही जाना
इक राह का पत्थर भी तो बेकार नहीं है