उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lagti nahin hai garmi-sardi

लगती नहीं है गर्मी-सर्दी

لگتی نہیں ہے گرمی سردی

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लगती नहीं है गर्मी-सर्दी
पहन के देखो क़ैस की वर्दी

आईनों से पूछ रहा हूँ
कैसे मिटे चेहरे की ज़र्दी

ख़ाली बर्तन बजने लगे थे
मैं ने सब में मिट्टी भर दी

पंख कतर देता चिड़िया के
तू ने तो गर्दन ही कतर दी

हम तो दीवाने हैं तेरे
दीवानों से क्या हमदर्दी

दाना था तो चुप रहता था
तू ने सदा पागल हो कर दी

मैं तो ख़ुद ही मरने को था
चारागरों ने जल्दी कर दी