उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lage hue the sabhi shor hi machane mein

लगे हुए थे सभी शोर ही मचाने में

لگے ہوئے تھے سبھی شور ہی مچانے میں

शायर: Jahanzeb Sahir8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लगे हुए थे सभी शोर ही मचाने में
जभी तो देर लगी आग को बुझाने में

वगर्ना मुझ से कोई काम ही न हो पाए
कुछ ऐसी बरकतें हैं तेरे मुस्कुराने में

अजीब साए सुकूनत किए हुए थे यहाँ
बड़ा सुकून मिला है ये घर जलाने में

बचा सका न तिरा इश्क़ दुख तो है लेकिन
लगा हुआ हूँ मैं अब नौकरी बचाने में

जो हो सके तो मिरे हिज्र में इज़ाफ़ा कर
कि मुझ से देर हुई तुझ से दिल लगाने में

बहा के ले गया दरिया तमाम बस्ती को
मगर ये लोग रहे कश्तियाँ बनाने में

मिरे मकाँ के अँधेरों को कौन समझाए
ख़ुशी मिली जो हवा को दिया बुझाने में

जो नाम हम ने कमाया है इश्क़ में 'साहिर'
जनाब-ए-क़ैस को सदियाँ लगीं कमाने में