उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDe KHulus se apna bana liya tha mujhe

बड़े ख़ुलूस से अपना बना लिया था मुझे

بڑے خلوص سے اپنا بنا لیا تھا مجھے

शायर: Jahanzeb Sahir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़े ख़ुलूस से अपना बना लिया था मुझे
तुम्हारे हिज्र ने ज़िंदा बचा लिया था मुझे

यक़ीन जान बहुत डर गया था उस दिन जब
गले से तू ने अचानक लगा लिया था मुझे

बिछड़ गए हैं तो सारा क़ुसूर है तेरा
कि तू ने सर पे जो इतना चढ़ा लिया था मुझे

मैं इतनी देर कहीं बैठ ही नहीं सकता
किसी ने हाथ पकड़ कर बिठा लिया था मुझे

जो इस तरह से मुझे ख़र्च कर रहा है तू
ये चंद रोज़ में कितना कमा लिया था मुझे

मुझे ख़ुशी है सुहूलत से अब मरूँगा मैं
कि एक बार तो उस ने बचा लिया था मुझे

वो सर्द शाम वो बारिश वो लापता यादें
किसी ने शाल में 'साहिर' छुपा लिया था मुझे