उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kai dinon se murawwat nahin hui mujhse

कई दिनों से मुरव्वत नहीं हुई मुझ से

کئی دنوں سے مروت نہیں ہوئی مجھ سے

शायर: Jahanzeb Sahir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कई दिनों से मुरव्वत नहीं हुई मुझ से
उसे भी कोई शिकायत नहीं हुई मुझ से

बहुत से काम दिखावे के कर रहा था मैं
ख़ुदा का शुक्र इबादत नहीं हुई मुझ से

नए सिरे से मोहब्बत की आरज़ू थी मगर
नए सिरे से मोहब्बत नहीं हुई मुझ से

ये लोग अपने अक़ीदे से प्यार करते हैं
इसी लिए तो अक़ीदत नहीं हुई मुझ से

मैं ज़िम्मेदार हूँ तेरी उदास आँखों का
मैं मानता हूँ हिफ़ाज़त नहीं हुई मुझ से

तमाम रात यूँही तीलियाँ जलाता रहा
दिया जलाने की हिम्मत नहीं हुई मुझ से

ये और बात तुझे दरगुज़र किया वर्ना
किसी के साथ रिआ'यत नहीं हुई मुझ से