उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lab-e-fasurda ko saghar talash karta hai

लब-ए-फ़सुर्दा को साग़र तलाश करता है

لب فسردہ کو ساغر تلاش کرتا ہے

शायर: Qamar Siwani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लब-ए-फ़सुर्दा को साग़र तलाश करता है
शिकस्ता नाव को लंगर तलाश करता है

वो कौन शख़्स था जो दश्त-ए-ज़ुल्मत-ए-ग़म में
मसर्रतों का समुंदर तलाश करता है

ज़रूर छेड़ेगा हक़ की लड़ाई काग़ज़ पर
क़लम ख़याल का लश्कर तलाश करता है

सफ़र जो करता है हिम्मत की रहनुमाई में
क़दम क़दम पे वो ठोकर तलाश करता है

ग़ज़ल के जिस्म पे बाज़ार-ए-फ़न का सौदागर
तख़य्युलात का ज़ेवर तलाश करता है

जो चाँद मान लूँ उस को तो मान लूँ कैसे
जो ख़ुद चराग़-ए-मुनव्वर तलाश करता है

'क़मर' को शाम-ओ-सहर है तलाश-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र
जो जौहरी है वो गौहर तलाश करता है