उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon qafas mein idhar-udhar dekhen

क्यों क़फ़स में इधर-उधर देखें

کیوں قفس میں ادھر ادھر دیکھیں

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों क़फ़स में इधर-उधर देखें
अब कोई और रहगुज़र देखें

घिर गए हैं निशाना-बाज़ों में
तीर देखें कि अपना सर देखें

इस तरह देख दूर जाते हुए
हम तिरी राह 'उम्र भर देखें

बंद कमरे में सिर्फ़ हम ही हैं
किस भरोसे इधर-उधर देखें

रेत पर क्यों तड़पती है मछली
आओ दरिया में डूब कर देखें

अब किसी रात शह्र में उस के
कैसे फिरते हैं दर-ब-दर देखें

अपने मलबे को मुँह दिखाना है
ग़ौर से पहले उस का घर देखें