उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon meri mohabbat ko wo Thukrae hue hain

क्यों मेरी मोहब्बत को वो ठुकराए हुए हैं

کیوں میری محبت کو وہ ٹھکرائے ہوئے ہیں

शायर: Faisal Qadri Gunnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों मेरी मोहब्बत को वो ठुकराए हुए हैं
क्या बात है वो किस लिए घबराए हुए हैं

महफ़िल में 'अजब कैफ़ है मस्ती का समाँ है
बे-पर्दा वो महफ़िल में जो आज आए हुए हैं

हम कब थे भला वाक़िफ़-ए-आदाब-ए-मोहब्बत
अंदाज़ ये सब आप के सिखलाए हुए हैं

साक़ी हों 'अता चश्म से पैमाने इन्हें भी
ख़ुद आए नहीं रिंद ये बुलवाए हुए हैं

वीरान नज़र आता है क्यों गुलशन-ए-हस्ती
क्यों ग़ुंचा-ओ-गुल आज ये मुरझाए हुए हैं

वाक़िफ़ नहीं शायद ये अभी रंग-ए-शफ़क़ से
आईने तिरे हुस्न पे इतराए हुए हैं

'फ़ैसल' मैं उन्हें फूल कहूँ या कि गुलिस्ताँ
जो गुलशन-ए-हस्ती मिरा महकाए हुए हैं