उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya yaad kar ke roun ki kaisa shabab tha

क्या याद कर के रोऊँ कि कैसा शबाब था

کیا یاد کر کے روؤں کہ کیسا شباب تھا

शायर: Lala Madhav Ram Jauhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या याद कर के रोऊँ कि कैसा शबाब था
कुछ भी न था हवा थी कहानी थी ख़्वाब था

अब इत्र भी मलो तो तकल्लुफ़ की बू कहाँ
वो दिन हवा हुए जो पसीना गुलाब था

महमिल-नशीं जब आप थे लैला के भेस में
मजनूँ के भेस में कोई ख़ाना-ख़राब था

तेरा क़ुसूर-वार ख़ुदा का गुनाहगार
जो कुछ कि था यही दिल-ए-ख़ाना-ख़राब था

ज़र्रा समझ के यूँ न मिला मुझ को ख़ाक में
ऐ आसमान मैं भी कभी आफ़्ताब था