उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya hamd-e-KHudawand are ashaar mein aawe

क्या हम्द-ए-ख़ुदावंद अरे अश'आर में आवे

کیا حمد خداوند ارے اشعار میں آوے

शायर: Umair Khan Umair13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या हम्द-ए-ख़ुदावंद अरे अश'आर में आवे
अफ़्कार में आवे तो कुछ इज़हार में आवे

यूसुफ़ का निशाँ भी न फिर अक़दार में आवे
नाख़ुन भी तिरा बिकने जो बाज़ार में आवे

क़द हश्र निगह बर्क़ ज़बाँ तेग़ अदा मौत
दिल ही का है दिल जो तिरी सरकार में आवे

ज़िल्लत की सियाही से है दस्तूर में मर्क़ूम
दस्तार जो बेचेगा वो दरबार में आवे

दिल नाफ़ पे आया मिरे अल्लाह ग़ज़ब है
बच पाती नहीं नाव जो मंजधार में आवे

हाँ दिल की तरह पेच मुक़द्दर का निकल जाए
इक बार अगर गेसू-ए-ख़मदार में आवे

वो होंट हसीं होंटों की हर बात हसीं-तर
इक़रार की लज़्ज़त मुझे 'इनकार' में आवे

मैं वार दूँ जन्नत की खरब लज़्ज़तें उस पर
वो मीठी सी इक चोट कि जो प्यार में आवे

लाग़र हूँ बहुत हिज्र से मत छेड़ जुनूँ आज
ख़ुद ख़ार अरे क्या वादी-ए-पुर-ख़ार में आवे

वो पूछता है दिल की तो कहता हूँ मैं डर के
तू हाथ से निकले जो ये इज़हार में आवे

क्या कीजिए ता'रीफ़ रुख़-ए-शो'ला-फ़गन की
काग़ज़ न जला दे अगर अश'आर में आवे

गुल चीज़ ज़मीं की है तो ख़ुर्शीद फ़लक की
क्यों छत से उतर कर वो यूँ गुलज़ार में आवे

वो गर नहीं आए न सही फिर तो 'उमैर' आज
इक तीर-ए-क़ज़ा ही दिल-ए-बीमार में आवे