उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aadam ki misl sine se nikla hai hae dil

आदम की मिस्ल सीने से निकला है हाए दिल

آدم کی مثل سینے سے نکلا ہے ہائے دل

शायर: Umair Khan Umair14 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आदम की मिस्ल सीने से निकला है हाए दिल
किस ने कहा था सेब-ए-ज़क़न उस का खाए दिल

इस बुत पे आए दिल कभी उस बुत पे आए दिल
अच्छी नहीं 'उमैर' सँभालो अदा-ए-दिल

आब-ए-लब और सेब-ए-ज़क़न हैं ग़िज़ा-ए-दिल
मर जाए गर न कुछ शब-ए-फ़ुर्क़त में खाए दिल

चख ले कभी जो ज़ाइक़ा-ए-दर्द-हा-ए-दिल
तो अपने वास्ते भी ख़ुदा इक बनाए दिल

जो खो गए न होगी अदा फिर बहा-ए-दिल
फिरते हैं ले के आप अरे क्यों पराए दिल

जुज़ तेरे मेरी जाँ किसे दुखड़े सुनाए दिल
मुश्किल-कुशा-ए-जाँ तू तू हाजत-रवा-ए-दिल

किस को जिगर है उस से कहे माजरा-ए-दिल
वो पी न जाए ख़ून अरे खा न जाए दिल

क्या मौत है ख़ुशी हुआ धक धक का शोर बंद
क्यों चुप है मेरे मरने पे मातम-सरा-ए-दिल

उठने पे जाने कैसी क़यामत वो ढाएगा
जो शोख़ ले उड़ा मिरा बैठे-बिठाए दिल

अच्छी है छेड़-छाड़ कि ये हैं इसी लिए
दिल है बराए-हुस्न हसीं हैं बरा-ए-दिल

घबरा के उठ खड़े वो तो महशर हुआ बपा
देती है बाँग-ए-सूर का काम इक सदा-ए-दिल

कहते हैं देख देख के आईने आप से
ऐसा हसीं हो कोई तो सौ बार आए दिल

धोका भी ग़म भी मेरी जवानी भी खा गया
ख़ंजर खुला जो अब न मिटे इश्तिहा-ए-दिल

मेरी कमर में ख़म कोई बेजा नहीं 'उमैर'
झुक जाए पुश्त बार-ए-अलम गर उठाए दिल