उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh din to baso meri aankhon mein

कुछ दिन तो बसो मिरी आँखों में

کچھ دن تو بسو مری آنکھوں میں (ردیف .. ا)

शायर: Obaidullah Aleem10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ दिन तो बसो मिरी आँखों में
फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या

कोई रंग तो दो मिरे चेहरे को
फिर ज़ख़्म अगर महकाओ तो क्या

जब हम ही न महके फिर साहब
तुम बाद-ए-सबा कहलाओ तो क्या

इक आइना था सो टूट गया
अब ख़ुद से अगर शरमाओ तो क्या

तुम आस बंधाने वाले थे
अब तुम भी हमें ठुकराओ तो क्या

दुनिया भी वही और तुम भी वही
फिर तुम से आस लगाओ तो क्या

मैं तन्हा था मैं तन्हा हूँ
तुम आओ तो क्या न आओ तो क्या

जब देखने वाला कोई नहीं
बुझ जाओ तो क्या गहनाओ तो क्या

अब वहम है ये दुनिया इस में
कुछ खोओ तो क्या और पाओ तो क्या

है यूँ भी ज़ियाँ और यूँ भी ज़ियाँ
जी जाओ तो क्या मर जाओ तो क्या