उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi titli nahin batati hai

कोई तितली नहीं बताती है

کوئی تتلی نہیں بتاتی ہے

शायर: Fahmi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई तितली नहीं बताती है
तेरी ख़ुश्बू कहाँ से आती है

क्या हुआ धूप अगर सताती है
चाँदनी भी यही बनाती है

एक बीमार आरज़ू दिल में
रोज़ बन-ठन के बैठ जाती है

ये मोहब्बत का मय-कदा है यहाँ
प्यास ही प्यास को बुझाती है

अब नहीं चौंकता हूँ मैं घर में
सारे पर्दे हवा हिलाती है

मेरे कमरे में अब बजाए मेरे
तेरी तस्वीर मुस्कुराती है

शिकवा-ए-हिज्र पर वो ये बोले
'ईद रोज़ों के बा'द आती है

ज़ब्त से पेट जब नहीं भरता
तो ग़रीबी उसूल खाती है

उस मकाँ का चराग़ हूँ 'फ़हमी'
जिस की झाड़ू हवा लगाती है