उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi pahra laga nahin hota

कोई पहरा लगा नहीं होता

کوئی پہرہ لگا نہیں ہوتا

शायर: Rafat Shameem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई पहरा लगा नहीं होता
मैं ही फिर भी रहा नहीं होता

ख़ून दिल का हुआ तो ये जाना
नक़्श क्यूँ देर-पा नहीं होता

वक़्त क्यूँ है ग़ुबार आँखों में
अक्स भी आश्ना नहीं होता

कुछ तो दिल से कहा है आँखों ने
ज़ख़्म-ए-दिल क्या हरा नहीं होता

फिर उसे ही तलाश करता हूँ
जिस का कोई पता नहीं होता

जो भी अपनी ज़बाँ से देता वो
ज़ाइक़ा बद-मज़ा नहीं होता