उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab tabiat kahan rawani mein

अब तबीअ'त कहाँ रवानी में

اب طبیعت کہاں روانی میں

शायर: Rafat Shameem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तबीअ'त कहाँ रवानी में
कश्ती टूटी है ठहरे पानी में

वक़्त यूँ थम गया है आँखों में
दाएरे जम गए हों पानी में

घर ही अंदर से लुट गया सारा
हम तो बाहर थे पासबानी में

लुत्फ़ मौसम का क्या उठाते हम
दिल हमेशा रहा गिरानी में

हम तो ख़ुश-फ़हमियों में जीते हैं
ख़ूब मतलब है बे-ज़बानी में