उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab KHwahish-e-duniya se koi kaam nahin hai

जब ख़्वाहिश-ए-दुनिया से कोई काम नहीं है

جب خواہش دنیا سے کوئی کام نہیں ہے

शायर: Rafat Shameem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब ख़्वाहिश-ए-दुनिया से कोई काम नहीं है
क्यूँ फिर दिल-ए-शोरीदा को आराम नहीं है

शामिल यहाँ इसबात में पहलू-ए-नफ़ी है
कामिल किसी आग़ाज़ का अंजाम नहीं है

वो धूप है आँखों में कि जल जाती है हर शाम
मंज़र है धुआँ कोई लब-ए-बाम नहीं है

क्या तर्ज़-ए-रिफ़ाक़त है कि मिलते हैं ब-सद-शौक़
पर ज़िक्र-ए-शनासाई-ओ-पैग़ाम नहीं है

तंग-ज़र्फ़ी-ए-हय्यत जिसे कहते हैं ग़ज़ल की
आफ़ाक़-ए-मआ'नी है वो इबहाम नहीं है