उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne ko aaghaz ko anjam mein paya humne

अपने को आग़ाज़ को अंजाम में पाया हम ने

اپنے کو آغاز کو انجام میں پایا ہم نے

शायर: Rafat Shameem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने को आग़ाज़ को अंजाम में पाया हम ने
राज़ क्या पर्दा-ए-इबहाम में पाया हम ने

खो गया था जो कभी भीड़ में चेहरों की उसे
अपनी तन्हाई की हर शाम में पाया हम ने

रेत भरते रहे आँखों में सराबों की सदा
'उज़्र जीने का उसी काम में पाया हम ने

कितने शीरीं लब-ए-ना-गुफ़्ता मगर थे उस के
लुत्फ़ कुछ और ही दुश्नाम में पाया हम ने

तुम तो ढूँडा किए उम्मीद-ओ-यक़ीं में उस को
दिल की हर ख़्वाहिश-ए-नाकाम में पाया हम ने