उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi nishani-e-ahd-e-visal de jae

कोई निशानी-ए-अहद-ए-विसाल दे जाए

کوئی نشانیٔ عہد وصال دے جائے

शायर: Hafeez Shahid7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई निशानी-ए-अहद-ए-विसाल दे जाए
वो मेरी उम्र मिरे माह-ओ-साल दे जाए

उसे कहो कि किसी रोज़ आ के फिर मुझ को
हसीन ख़्वाब अछूते ख़याल दे जाए

पलट के आए कभी उस की याद का मौसम
गुल-ए-मुराद को रंग-ए-जमाल दे जाए

ख़ुदा करे कि अचानक वो सामने आ कर
मिरे लबों को नए कुछ सवाल दे जाए

तमाम उम्र की ख़ुशियाँ समेट कर मेरी
तमाम उम्र के अपने मलाल दे जाए

कोई तो हो जो मिरे चारा-गर से जा के कहे
दवा कभी तो मिरे हस्ब-ए-हाल दे जाए

अगर नहीं है मुदावा ज़वाल का 'शाहिद'
वो हौसला तो ब-वक़्त-ए-ज़वाल दे जाए