उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kiye humne junun se nukta-chin-o-nukta-dan paida

किए हम ने जुनूँ से नुक्ता-चीन-ओ-नुक्ता-दाँ पैदा

کئے ہم نے جنوں سے نکتہ چین و نکتہ داں پیدا

शायर: Zaheen Shah Taji7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किए हम ने जुनूँ से नुक्ता-चीन-ओ-नुक्ता-दाँ पैदा
हम ऐसे आदमी होते हैं दुनिया में कहाँ पैदा

हज़ारों बद-गुमानी हुस्न से अहल-ए-हवस को हैं
मोहब्बत ने किया है हुस्न से हुस्न-ए-गुमाँ पैदा

न होते हम तो वो मा'बूद-ए-जान-ओ-दिल कहाँ होते
जबीं पहले हुई पैदा कि संग-ए-आस्ताँ पैदा

तबस्सुम बन गई उन के लबों पर हर फ़ुग़ाँ मेरी
हुई उन के तबस्सुम से मिरे लब पर फ़ुग़ाँ पैदा

वहाँ जा कर हक़ीक़त रूह की हम पर हुई ज़ाहिर
हुई है तेरी सूरत से जहाँ तस्वीर-ए-जाँ पैदा

समझ हो तो वहाँ फिर क्यों बनाए आशियाँ कोई
जहाँ बिजली की क़िस्मत से हो शाख़-ए-आशियाँ पैदा

'ज़हीन' उस क़ाफ़िले की गर्द चश्म-ए-दिल का सुर्मा है
हुई है दिल के सहरा में जो गर्द-ए-कारवाँ पैदा