उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi tarah to use mar dun jo bahar hai

किसी तरह तो उसे मार दूँ जो बाहर है

کسی طرح تو اسے مار دوں جو باہر ہے

शायर: Aamir Ata7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी तरह तो उसे मार दूँ जो बाहर है
वो शख़्स कैसे मरेगा जो मेरे अंदर है

सिखा दिया मुझे आदाब-ए-गुफ़्तुगू तू ने
मिरे लिए तो तिरा हुस्न ही ग्रामर है

अब उस के सामने सच बोलने न लग जाना
वो मेरे बारे में पूछे तो कहना बेहतर है

लो अब तो बैठे-बिठाए ही दीद होती है
वबा का दौर है सो आज-कल वो घर पर है

अब ऐसे में मिरे दिल से दुआ ही निकलेगी
वो सुर्ख़ जोड़े में जो आज बन-सँवर कर है

फिर अश्क हो गए बे-मोल जब ये उस ने कहा
निकाल दूँ मैं तिरी आँख में जो कंकर है

हर एक राह से गुज़रा हूँ बे-नियाज़ाना
'अता' ग़रज़ का पुजारी नहीं क़लंदर है