उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ne na jab dekha-bhaala mujhe

किसी ने न जब देखा-भाला मुझे

کسی نے نہ جب دیکھا بھالا مجھے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी ने न जब देखा-भाला मुझे
मेरी ठोकरों ने सँभाला मुझे

कोई ग़ौर से देखता ही नहीं
बहुत चुभ रहा है उजाला मुझे

नए ज़ाइक़ों का परस्तार हूँ
बना ले न दुनिया निवाला मुझे

गिराया था तू ने नज़र से जहाँ
वहीं पे पड़ा हूँ उठा ला मुझे

अकेला मिलूँगा किसी दश्त में
कोई नाम ले कर बुला ला मुझे

खनक चाबियों की सुनाते हैं लोग
दिखा कर तिरे घर का ताला मुझे

मिरे पीछे-पीछे जो चलती रही
उसी भीड़ ने मार डाला मुझे

फ़क़त हाथ फैला के मेरी तरफ़
मिरी गोद में उस ने पाला मुझे