उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi nashshe se beshtar to na tha

किसी नश्शे से बेशतर तो न था

کسی نشے سے بیشتر تو نہ تھا

शायर: Balraj Hairat9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी नश्शे से बेशतर तो न था
रिश्ता-ए-ग़म भी मो'तबर तो न था

मेरे अंजाम उन्हें फ़रेब न दे
कम-बसर था मैं कम-नज़र तो न था

कम तो पहले भी थे न अहल-ए-जुनूँ
लेकिन अब तक जुनूँ हुनर तो न था

अपनी हर ख़ुद-सुपुर्दगी की क़सम
मैं जहाँ था वो मेरा घर तो न था

हम थे राहें तराशने के लिए
शामिल इस फ़र्ज़ में सफ़र तो न था

साए लोगों के सर पे किस ने किए
दूर तक एक भी शजर तो न था

ख़ाक पर गिर के मिट गया आख़िर
अश्क फिर अश्क था गुहर तो न था

वादी-ए-मर्ग क्यों अदम ठहरी
ज़िंदगी से वहाँ मफ़र तो न था

वक़्त की बात है मियाँ 'हैरत'
दिल लगाने में ऐसा डर तो न था