उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi na-fahm se izhaar-e-tamanna karna

किसी ना-फ़हम से इज़्हार-ए-तमन्ना करना

کسی نافہم سے اظہار تمنا کرنا

शायर: Ehsan Darbhangavi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी ना-फ़हम से इज़्हार-ए-तमन्ना करना
अपनी ख़ामोश मोहब्बत को है रुस्वा करना

है अभी देर कि हो अक़्ल शरीक-ए-जज़्बात
शौक़ को है अभी मातम तन-ए-तन्हा करना

खुल सकी हम से न अब तक ग़म-ए-जानाँ की गिरह
अभी बाक़ी है इलाज-ए-ग़म-ए-दुनिया करना

अब ये गेसू हैं जो आशुफ़्ता तो किस का है क़ुसूर
हम ने तो छोड़ दिया अर्ज़-ए-तमन्ना करना

ज़ुल्फ़ की छाँव में आराम किया चल निकला
इक मुसाफ़िर पे न था तुम को भरोसा करना

कुछ कशिश मेरी नज़र को भी अता कर ऐ दोस्त
तेरे बिखरे हुए जल्वों को है यकजा करना

तुम को 'एहसान' मुबारक हो ये अंदाज़-ए-‘जमील’
रंग अपना भी मगर चाहिए पैदा करना