उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ka aahang kaif-za hai kisi ka lahja gulu-girafta

किसी का आहंग कैफ़-ज़ा है किसी का लहजा गुलू-गिरफ़्ता

کسی کا آہنگ کیف زا ہے کسی کا لہجہ گلو گرفتہ

शायर: Saba Naqvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी का आहंग कैफ़-ज़ा है किसी का लहजा गुलू-गिरफ़्ता
ब-क़द्र-ए-इरफ़ान ज़िंदगी है हर एक दिल आरज़ू-गिरफ़्ता

ये कैसी तस्वीर-ए-ज़िंदगी है जो सफ़्हा-ए-दहर पर खिंची है
सितम का ख़ंजर है ज़ेर-ए-दामाँ तो आस्तीं है लहू-गिरफ़्ता

मुसाफ़िर-ए-कू-ब-कू का यारो नहीं कोई मुस्तक़िल ठिकाना
हयात है आरज़ू की मारी मज़ाक़ है जुस्तुजू-गिरफ़्ता

किसी की दुनिया उजड़ चुकी है नसीब को रो रहा है कोई
किसी का गुलशन हरा भरा है कोई है ज़ौक़-ए-नुमू-गिरफ़्ता

लिबास-अंदर-लिबास रह कर नज़र में जो बे-लिबास ठहरे
बदन चुराए तो किस तरह से वो महवश-ए-आबरू-गिरफ़्ता

कभी भी इस पर ख़िज़ाँ का साया न पड़ सका है न पड़ सकेगा
ग़ज़ल वो बाग़-ए-सुख़न है जिस की बहार है रंग-ओ-बू-गिरफ़्ता

निगाह-ए-साक़ी की एक जुम्बिश है लाख तस्कीन-ए-दिल का सामाँ
'सबा' वो एहसास-ए-तिश्नगी है कभी न हो जो सुबू-गिरफ़्ता