उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis ne ki baat abhi kaun shanasa nikla

किस ने की बात अभी कौन शनासा निकला

کس نے کی بات ابھی کون شناسا نکلا

शायर: Ehtisham ul Haq Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस ने की बात अभी कौन शनासा निकला
याद आया तो मिरा अपना ही चेहरा निकला

गर्मी-ए-ज़ीस्त नहीं आज मुक़द्दर में मिरे
आज सूरज भी जो निकला तो अधूरा निकला

लौट जाने में लगेंगे मुझे बरसों शायद
ये समुंदर तो मिरी सोच से गहरा निकला

जिस्म तो ले गया वो रात में चोरी कर के
सुब्ह बिस्तर से मिरे जिस्म का ख़ाका निकला

ज़हमत-ए-नुत्क़ से यूँ बच गए दोनों आख़िर
मैं ही गूँगा न था वो शख़्स भी बहरा निकला