उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis naz kis andaz se tum hae chalo ho

किस नाज़ किस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो

کس ناز کس انداز سے تم ہائے چلو ہو

शायर: Kaleem Aajiz4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस नाज़ किस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो
रोज़ एक ग़ज़ल हम से कहलवाए चलो हो

रखना है कहीं पाँव तो रक्खो हो कहीं पाँव
चलना ज़रा आया है तो इतराए चलो हो

मय में कोई ख़ामी है न साग़र में कोई खोट
पीना नहीं आए है तो छलकाए चलो हो

हम कुछ नहीं कहते हैं कोई कुछ नहीं कहता
तुम क्या हो तुम्हीं सब से कहलवाए चलो हो