उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis ka aks numayan hoga aise gadle pani mein

किस का अक्स नुमायाँ होगा ऐसे गदले पानी में

کس کا عکس نمایاں ہوگا ایسے گدلے پانی میں

शायर: Osama Khalid6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस का अक्स नुमायाँ होगा ऐसे गदले पानी में
सूरज डूब गया है मेरे आँगन की वीरानी में

इस घर की दीवार में जाने किस के कान फँसे होंगे
सिर्फ़ यही डर लाहिक़ है मुझ को हर नक़्ल-ए-मकानी में

हिज्र की शब रौशन था घर में एक सितारा और चराग़
आँख झपकने तक का वक़्त नहीं था इस हैरानी में

मुझ से पहले भी कुछ वहशी इस उलझन में फ़ौत हुए
आख़िर किस का दस्त-ए-जुनूँ है वहशत की आसानी में

सुर्ख़ अंधेरा छटने की मिन्नत का फीका ज़र्द चराग़
छोड़ दिया है साँप किसी ने झील के सादा पानी में

जैसे किसी ने बच्चों वाले घर में साँप को रखना हो
ऐसे मुझे डर लगता है इस हिज्राँ की निगरानी में