उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab mein ya KHayal mein mujhe mil

ख़्वाब में या ख़याल में मुझे मिल

خواب میں یا خیال میں مجھے مل

शायर: Rafi Raza9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब में या ख़याल में मुझे मिल
तू कभी ख़द्द-ओ-ख़ाल में मुझे मिल

मेरे दिल की धमाल में मुझे देख
मेरे सुर मेरी ताल में मुझे मिल

मेरी मिट्टी को आँख दी है तो फिर
किसी मौज-ए-विसाल में मुझे मिल

मुझे क्यूँ अरसा-ए-हयात दिया
अब इन्हें माह-ओ-साल में मुझे मिल

किसी सुब्ह-ए-फ़िराक़ में मुझे छोड़
किसी शाम-ए-मलाल में मुझे मिल

तू ख़ुद अपनी मिसाल है वो तो है
इसी अपनी मिसाल में मुझे मिल

तेरे शायान-ए-शाँ है वस्फ़ यही
किसी वक़्त-ए-मुहाल में मुझे मिल

मेरे कल का पता नहीं मेरी जाँ
तू अभी मेरे हाल में मुझे मिल

मुझे मिल के 'उरूज दे या न दे
मेरे वक़्त-ए-ज़वाल में मुझे मिल