उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agarche waqt munajat karne wala tha

अगरचे वक़्त मुनाजात करने वाला था

اگرچہ وقت مناجات کرنے والا تھا

शायर: Rafi Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगरचे वक़्त मुनाजात करने वाला था
मिरा मिज़ाज सवालात करने वाला था

मुझे सलीक़ा न था रौशनी से मिलने का
मैं हिज्र में गुज़र-औक़ात करने वाला था

मैं सामने से उठा और लौ लरज़ने लगी
चराग़ जैसे कोई बात करने वाला था

खुली हुई थीं बदन पर रवाँ रवाँ आँखें
न जाने कौन मुलाक़ात करने वाला था

वो मेरे काबा-ए-दिल में ज़रा सी देर रुका
ये हज अदा वो मिरे साथ करने वाला था

कहाँ ये ख़ाक के तोदे तले दबा हुआ जिस्म
कहाँ मैं सैर-ए-समावात करने वाला था