उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankh sahmi hui Darti hui dekhi gai hai

आँख सहमी हुई डरती हुई देखी गई है

آنکھ سہمی ہوئی ڈرتی ہوئی دیکھی گئی ہے

शायर: Rafi Raza7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँख सहमी हुई डरती हुई देखी गई है
अम्न की फ़ाख़्ता मरती हुई देखी गई है

क्या बचा कितना बचा ताब किसे है देखे
मौज-ए-ख़ूँ सर से गुज़रती हुई देखी गई है

ऐसे लगता है यहाँ से नहीं जाने वाली
जो सियह-रात ठहरती हुई देखी गई है

दूसरी बार हुआ है कि यही दोस्त हुआ
पर परिंदों के कतरती हुई देखी गई है

एक उजड़ी हुई हसरत है कि पागल हो कर
बैन हर शहर में करती हुई देखी गई है

मौत चमकी किसी शमशीर-ए-बरहना की तरह
रौशनी दिल में उतरती हुई देखी गई है

फिर किनारे पे वही शोर वही लोग 'रज़ा'
फिर कोई लाश उभरती हुई देखी गई है