उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aana jaana hai to qamat se tum aao jao

आना जाना है तो क़ामत से तुम आओ जाओ

آنا جانا ہے تو قامت سے تم آؤ جاؤ

शायर: Rafi Raza8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आना जाना है तो क़ामत से तुम आओ जाओ
दर-ए-इज़हार-ए-मुरव्वत से तुम आओ जाओ

वो तहय्युर जो तुम्हें ले के यहाँ आया था
उस तहय्युर की विसातत से तुम आओ जाओ

हम किसी सम्त बगूलों को नहीं रोकते हैं
गर्मी-ए-ज़ौक़ शरारत से तुम आओ जाओ

कफ़ उड़ाने पे भी पाबंदी नहीं है कोई
हाँ मगर थोड़ी नफ़ासत से तुम आओ जाओ

हमें उम्मीद-ए-बलाग़त तो नहीं है तुम से
बस ज़रा थोड़ी बुलूग़त से तुम आओ जाओ

किस ने रोका है सर-ए-राह-ए-मोहब्बत तुम को
तुम्हें नफ़रत है तो नफ़रत से तुम आओ जाओ

तुम कि तिफ़्लान-ए-अदब साथ लगाए हुए हो
किसी मन्क़ूल शरी'अत से तुम आओ जाओ

हम ने अश’आर का दरवाज़ा खुला रक्खा है
जब भी जी चाहे सुहूलत से तुम आओ जाओ