उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab mein kar ke rihai ke nazare qaidi

ख़्वाब में कर के रिहाई के नज़ारे क़ैदी

خواب میں کر کے رہائی کے نظارے قیدی

शायर: Aamir Ata7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब में कर के रिहाई के नज़ारे क़ैदी
जाग कर रोते रहे आज बेचारे क़ैदी

आप की दुनिया में झूले की सुहूलत होगी
झूलते हैं यहाँ सूली के सहारे क़ैदी

जानते थे कि रिहाई की कोई राह नहीं
रोज़ करते थे पर अंधों को इशारे क़ैदी

रात की आड़ में मिलती हैं सज़ाएँ क्या क्या
शाहज़ादी को लुभाते हैं कुँवारे क़ैदी

उस ने ज़िंदान के सूराख़ तलक बंद किए
काट लें रात न गिनते हुए तारे क़ैदी

है गिरफ़्तार-ए-अना हर कोई ता-हद-निगाह
ज़ुल्मत-आबाद में अब किस को पुकारे क़ैदी

तुम तो यादों को भी हमराह लिए जाते हो
छोड़ कर जाओ इन्हें ये हैं हमारे क़ैदी