उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab jannat ke hain be-mahal dosto

ख़्वाब जन्नत के हैं बे-महल दोस्तो

خواب جنت کے ہیں بے محل دوستو

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब जन्नत के हैं बे-महल दोस्तो
कुछ भी होता नहीं बे-अमल दोस्तो

मेरा दावा नहीं बे-अमल दोस्तो
देखना याद आऊँगा कल दोस्तो

हम मिज़ाज-ए-ग़ज़ल से हैं ख़ूब आश्ना
हम से क़ाएम है हुस्न-ए-ग़ज़ल दोस्तो

रंज के बा'द राहत भी है लाज़मी
आज गुज़रा तो आएगी कल दोस्तो

लाख चाहो मगर मसअला ज़ीस्त का
बे-अमल हो सकेगा न हल दोस्तो

आज धूमें मचा लीं सर-ए-मय-कदा
कौन जाने कहाँ होंगे कल दोस्तो

अपने अपने तख़य्युल की परवाज़ है
अपना अपना है रंग-ए-ग़ज़ल दोस्तो

क्या कहे हाल-ए-दिल 'आसी'-ए-ख़स्ता-जाँ
चैन दिल को नहीं एक पल दोस्तो