उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab aankhon mein sawali hi rahe

ख़्वाब आँखों में सवाली ही रहे

خواب آنکھوں میں سوالی ہی رہے

शायर: Obaid Siddiqi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब आँखों में सवाली ही रहे
कासा-ए-ताबीर ख़ाली ही रहे

रक़्स करती ख़्वाहिशों के ज़ेर-ए-पा
दिल शिकार-ए-पाएमाली ही रहे

ख़ाक हो जाते लहू की आग में
जिस्म के कूज़े सिफ़ाली ही रहे

ज़िंदगी इन से सिवा निकली यहाँ
फ़लसफ़े सारे ख़याली ही रहे

सब्ज़ा-ए-मैदाँ पे कब उतरी ख़िज़ाँ
शोर इस का डाली डाली ही रहे

चाँद निकला तो ग़ज़ब ढा जाएगा
रात बेहतर है ये काली ही रहे