उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHun ke ghunT kai bar piye hain maine

ख़ून के घूँट कई बार पिए हैं मैं ने

خون کے گھونٹ کئی بار پئے ہیں میں نے

शायर: Naeem Najmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ून के घूँट कई बार पिए हैं मैं ने
इक जवानी में कई 'इश्क़ किए हैं मैं ने

हुस्न वालों से रफ़ीक़ों से रक़ीबों से मुझे
जितने भी ज़ख़्म मिले ख़ुद ही सिए हैं मैं ने

सच तो ये है जो तिरे साथ नहीं गुज़रे हैं
कितनी मुश्किल से वो लम्हात जिए हैं मैं ने

जिस की फ़ुर्क़त ने कहीं का नहीं छोड़ा मुझ को
वो समझता है उसे धोके दिए हैं मैं ने

हक़-बयानी की सज़ाएँ भी बहुत काटी हैं
बेवफ़ाई के भी इल्ज़ाम लिए हैं मैं ने