उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHushi ka dusra pahlu hai aur gham kya hai

ख़ुशी का दूसरा पहलू है और ग़म क्या है

خوشی کا دوسرا پہلو ہے اور غم کیا ہے

शायर: Om Krishn Rahat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुशी का दूसरा पहलू है और ग़म क्या है
नफ़स की आमद-ओ-शुद ही तो है ये दम क्या है

पढ़ा था कातिब-ए-तक़दीर का लिखा हम ने
तभी चला था पता वक़अत-ए-क़लम क्या है

कोई भी ठीक कभी ठीक से नहीं रक्खा
मुझे पता ही नहीं बेश क्या है कम क्या है

झुके न यार के दर पर तो वो जबीं कैसी
उठे न जानिब-ए-मंज़िल तो वो क़दम क्या है

कुछ ऐसा फ़र्क़ नहीं ए'तिक़ाद की सौगंद
मुझे ख़बर है यक़ीं क्या है और भरम क्या है

यही कि झेलूँगा हँस हँस के सब मसाइब मैं
मुझे पता है जबीं पे मिरी रक़म क्या है

मैं माँग माँग के 'राहत' दुआएँ समझा हूँ
जहाँ में ग़ैर-अहम क्या है और अहम क्या है