उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHushbu se fazaon ko jo mahkaya hua hai

ख़ुश्बू से फ़ज़ाओं को जो महकाया हुआ है

خوشبو سے فضاؤں کو جو مہکایا ہوا ہے

शायर: Naeem Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुश्बू से फ़ज़ाओं को जो महकाया हुआ है
मेहमाँ कोई परदेस से घर आया हुआ है

मिलने की नहीं मुझ को मोहब्बत से रिहाई
फ़रमान उधर से तो यही आया हुआ है

ऐसे तो कभी मुझ से वो बोला ही नहीं था
शायद कि किसी और का भड़काया हुआ है

मैं ने भी चुरा ली हैं उसे देख के नज़रें
कुछ वो भी मिरे सामने शरमाया हुआ है

दुनिया पे 'इताब आया है अल्लाह ये कैसा
जो शख़्स भी मिलता है वो घबराया हुआ है

कह दीजिए आँधी से अभी छत पे न आए
वो बाल सुखाने के लिए आया हुआ है

कुछ कर लो मगर 'नजमी' वही हो के रहेगा
पहले से मुक़द्दर में जो लिखवाया हुआ है