उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHushbu ka jism yaad ka paikar nahin mila

ख़ुशबू का जिस्म याद का पैकर नहीं मिला

خوشبو کا جسم یاد کا پیکر نہیں ملا

शायर: Tahir Tilhari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुशबू का जिस्म याद का पैकर नहीं मिला
दिल जिस से हो शगुफ़्ता वो मंज़र नहीं मिला

आख़िर बुझाता कैसे वो अपनी लहू की प्यास
तलवार मिल गई तो कोई सर नहीं मिला

नागाह दोस्तों की तरफ़ उठ गई निगाह
जब दुश्मनों के हाथ में ख़ंजर नहीं मिला

फिरता हूँ कब से नक़्द-ए-दिल-ओ-जाँ लिए हुए
मैं वो सख़ी हूँ जिस को गदागर नहीं मिला

'ताहिर' मिटेगा कैसे ये बे-चेहरगी का ग़म
वो संग हूँ जिसे कोई आज़र नहीं मिला