उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khuli aankhon mein sapna jhankta hai

खुली आँखों में सपना झाँकता है

کھلی آنکھوں میں سپنا جھانکتا ہے

शायर: Parveen Shakir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खुली आँखों में सपना झाँकता है
वो सोया है कि कुछ कुछ जागता है

तिरी चाहत के भीगे जंगलों में
मिरा तन मोर बन कर नाचता है

मुझे हर कैफ़ियत में क्यूँ न समझे
वो मेरे सब हवाले जानता है

मैं उस की दस्तरस में हूँ मगर वो
मुझे मेरी रज़ा से माँगता है

किसी के ध्यान में डूबा हुआ दिल
बहाने से मुझे भी टालता है

सड़क को छोड़ कर चलना पड़ेगा
कि मेरे घर का कच्चा रास्ता है