उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHudi ke bagh ke phulon ki tazgi hun main

ख़ुदी के बाग़ के फूलों की ताज़गी हूँ मैं

خودی کے باغ کے پھولوں کی تازگی ہوں میں

शायर: Qamar Siwani8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुदी के बाग़ के फूलों की ताज़गी हूँ मैं
बहार-ए-हुस्न-ए-तमद्दुन की दिलकशी हूँ मैं

ज़मीर-ए-ज़र्फ़ हूँ तहज़ीब-ए-आजिज़ी हूँ मैं
मिज़ाज-ए-सब्र-ओ-तहम्मुल की सादगी हूँ मैं

न चाँद हूँ न सितारा न चाँदनी हूँ मैं
चराग़-ए-अज़्मत-ए-ग़ैरत की रौशनी हूँ मैं

सुलगती धूप की ख़ातिर हूँ छाँव राहत की
अदब की ख़ुश्क ज़मीं के लिए नमी हूँ मैं

ख़ुलूस वाले को पहचानता नहीं कोई
नई सदी की निगाहों में अजनबी हूँ मैं

किसी अमीर का एहसाँ लिया न मैं ने कभी
ख़ुदी को नाज़ है जिस पर वो आदमी हूँ मैं

अमीर-ए-शहर से मेरा कोई लगाव नहीं
ग़रीब-ए-शहर से निस्बत है मुफ़्लिसी हूँ मैं

वफ़ा के गहरे समुंदर से मेरा रिश्ता है
'क़मर' ख़ुलूस की बहती हुई नदी हूँ मैं