उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHuda ke waste ai KHun-e-dil zahir ho paikan par

ख़ुदा के वास्ते ऐ ख़ून-ए-दिल ज़ाहिर हो पैकाँ पर

خدا کے واسطے اے خون دل ظاہر ہو پیکاں پر

शायर: Qamar Jalalvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुदा के वास्ते ऐ ख़ून-ए-दिल ज़ाहिर हो पैकाँ पर
कि अब तो हाल-ए-नादारी खुला जाता है मेहमाँ पर

ये क्यों शर्मा रहे हो तुम मिरी वहशत के सामाँ पर
तुम्हारा नाम तो लिक्खा नहीं चाक-ए-गरेबाँ पर

तिरी रुस्वाइयों के डर से वहशत काँप जाती है
धड़क उठता है दिल जब हाथ जाता है गरेबाँ पर

अभी पत्तों पे बाक़ी हैं जले तिनकों की तहरीरें
ये वो तारीख़ है बिजली गिरी थी जब गुलिस्ताँ पर

ग़रीबी में मिरा मरना 'क़मर' रश्क-ए-अमीरी है
चढ़ेंगी चाँदनी की चादरें गोर-ए-ग़रीबाँ पर