उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud ko jab se jaan gae hum

ख़ुद को जब से जान गए हम

خود کو جب سے جان گئے ہم

शायर: Rafat Shameem4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद को जब से जान गए हम
दुनिया को पहचान गए हम

दुश्मन को जब पास से देखा
दोस्त को भी पहचान गए हम

मन में कैसी आग लगी ये
तन की चादर तान गए हम

उस के दयार-ए-शौक़ से अक्सर
ख़ुद ही तही-दामान गए हम