उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHayal apna udhar laga ke

ख़याल अपना उधर लगा के

خیال اپنا ادھر لگا کے

शायर: Badr Muneer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़याल अपना उधर लगा के
पड़ा हूँ अब दिल को डर लगा के

वो आप रू-पोश हो गया है
हमारे ज़िम्मे सफ़र लगा के

कलाम हम से करेगा लेकिन
अगर लगा के मगर लगा के

किसी के बारे में सोचता है
किसी के सीने से सर लगा के

हुए हैं सपने 'अज़ीज़ जब से
उड़ी मिरी नींद पर लगा के

'मुनीर' रुख़ पर शिकस्त-ए-दिल की
मैं फिर रहा हूँ ख़बर लगा के